मंगलवार, 10 जून 2014

मेरा मन मेरी बात

हर एक व्यक्ति को अपने अपने मन की बात रखने का पूरा पूरा अधिकार एवं स्वतंत्रता है. हो सकता है  की किसी दुसरे व्यक्ति की भाषा व् विचार में समीक्षा के भाव पाये जाये किन्तु ये उसका अपना मत है. यदि आपको इसमें कोई भी आपत्ति होती है, तो इस दशा में आप अपने विचार एवं अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने हेतु पूर्णतया स्वतंत्र हैं। लेकिन किसी भी दशा में आपको किसी दुसरे के विचारो और लेखन को रोकने का को भी अधिकार नहीं है। किसी के व्यक्तव्य से किसी दूसरे की नाराजगी काफी हद तक जायज है और वो उसके प्रति अपने विपरीत भाव भी प्रकट कर सकता है पर किसी दूसरे की लेखनी पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता। आपकी अपनी लेखनी पूर्णतया स्वतंत्र है उसका प्रतिउत्तर प्रस्तुत करने को।

ये तो हर कोई भली भांति जनता है की उसे लेखन की सभी उचित मान्यताओ का पूरा पूरा ध्यान रखना चाहिए एवं अपनी लेखनी को संयत रूप में प्रस्तुत करना चाहिये।

रीता माथुर